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कल रखा जायेगा सावन शिवरात्रि व्रत, जानें शिव की चार प्रहर की पूजा का महत्व व पूजन विधि

Sawan Shivratri 2021: वैसे तो सावन के पूरे महीने में किसी भी समय भगवान शिव की विधि सम्मत पूजा लाभदायक होती है. परंतु शिवरात्रि को भगवान शिव की विशेष कृपा पाने के लिए चार प्रहर की पूजा विशेष होती है. मान्यता है कि चार प्रहर की पूजा से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है.

चार प्रहर की पूजा विधि

शिवरात्रि पर भगवान शिव के लिए चार प्रहर की पूजा का विधान होता है. इस दिन भगवान शिव की पूजा रात्रि के चारों प्रहर में की जाती है. शिवरात्रि के दिन चार प्रहर की पूजा करने के लिए शिव भक्त को सूर्यास्त के पूर्व ही स्नान कर लेना चाहिए तथा सूर्यास्त के पश्चात् उसे भगवान शिव की साधना आरंभ कर देनी चाहिए. यह पूजा किसी शिवालय में करें तो उत्तम होगा, परंतु यदि यह संभव न हो तो अपने घर में ही शिवजी का चित्र या मूर्ति रखकर कर सकते हैं.

चार प्रहर की पूजा के तहत भगवान शिव की चारों प्रहर में विधि –विधान से पूजा एवं अभिषेक करना चाहिए. पूजा के दौरान भगवान शिव का दूध एवं जल से रुद्राष्टध्यायी के मंत्रों के साथ अभिषेक करें. यदि यह संभव न हो तो भगवान शिव के सहस्त्रनाम या फिर रुद्राष्टकमं से भगवान शिव का जलाभिषेक करें. यदि साधक के लिए यह भी मुश्किल हो तो उसे केवल  ‘ह्रीं शिवाय नम:’ का जप करते हुए शिव का जलाभिषेक करें.

रात्रि के चारों प्रहर में इसी प्रकार की पूजा करें. शिव भक्त इस बात का ध्यान रखें कि वे एक प्रहर की पूजा समाप्त करने के बाद स्नान जरूर करें. उसके बाद ही दूसरे प्रहर की पूजा प्रारंभ करें. 

 


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