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कोरोना संकट से उबर रही है वैश्विक अर्थव्‍यवस्‍था! RBI गवर्नर ने कहा- इकोनॉमिक ग्रोथ के लिए निवेश बढ़ाने की जरूरत

नई दिल्ली. भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास (RBI Governor Shakti Kant Das) ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी के बाद आर्थिक वृद्धि की रफ्तार (Economic Growth) को बढ़ाने के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं और इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर सेक्‍टर में निवेश बढ़ाने की जरूरत है. इसके अलावा श्रम और उत्पाद बाजारों में सुधारों को आगे बढ़ाने की जरूरत है. उन्‍होंने इकोनॉमिक ग्रोथ और रोजगार के नए मौके (Employment Opportunities) पैदा करने के लिए हेल्‍थ एजुकेशन, डिजिटल सेक्‍टर में ढांचागत सुविधाओं में निवेश बढ़ाने की वकालत की.

आरबीआई के गवर्नर दास ने उन्‍होंने एआईएमए के 48वें नेशनल मैनेजमेंट कन्वेंशन (AIMA National Management Convention) में कहा कि दुनियाभर की अर्थव्‍यवस्‍थाओं के कोरोना संकट से उबरने के संकेत मिल रहे हैं. उन्‍होंने कहा कि कोरोना महामारी हमारे युग की सबसे खराब घटनाओं में एक है. इसने दुनियाभर में भारी तबाही फैलाई है. इसने दुनियाभर में जानमाल और आजीविका के साधनों को नुकसान पहुंचाया है. दुनिया में इस तरह के संकट के बहुत ही कम उदाहरण मिलते हैं. साथ ही कहा कि इस महामारी में वैश्विक अर्थव्‍यवस्‍था पर गहरे घाव छोड़े हैं. इसकी वजह से उभरते और विकासशील देशों में सबसे ज्‍यादा समाज का गरीब और वंचित तबका सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है.

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फाइनेंशियल सिस्‍टम में जरूरत के मुताबिक हुआ बदलाव
दास ने कहा कि भारत के फाइनेंशिल सिस्टम ने जरूरत के हिसाब से तेजी से बदलाव किया है. कोरोना के बाद अर्थव्‍यवस्‍था में हो रही रिकवरी एक समान नहीं रही है. प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम (PLI) देश में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए काफी अहमियत रखती है. जरूरी है कि इस स्कीम के दायरे में आने वाली कंपनियां और सेक्टर्स क्षमता में सुधार के लिए इसका सही इस्‍तेमाल करें. उन्होंने ये भी कहा कि कोरोना के बाद की स्थिति में बेहतर तकनीक की जरूरत होगी. उन्‍होंने कहा कि हमारा प्रयास महामारी के बाद रहने योग्य और टिकाऊ वृद्धि सुनिश्चित करने का होना चाहिए. आने वाले समय में निजी खपत को टिकाऊ रूप से पटरी पर लाना अहम होगा.

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एनबीएफसी फंडिंग चैनल में निभा रहे हैं अहम भूमिका
आरबीआई गवर्नर के मुताबिक, अब तक बैंकों ने देश में क्रेडिट के मूल आधार की भूमिका निभाई है. अब एनबीएफसी भी देश के फंडिंग चैनल में अहम भूमिका निभा रहे हैं. एनबीएफसी और म्‍यूचुअल फंड्स जैसे नान-बैंकिंग फाइनेंशियल इंटरमीडियरीज के असेट में लगातार बढ़त देखने को मिल रही है. साथ ही कॉर्पोरेट बॉन्‍ड्स जैसे मार्केट इंस्ट्रूमेंट से होने वाली फंडिंग में भी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. ये देश के फाइनेंशियल सिस्टम में आ रही परिपक्वता का संकेत है.

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इकोनॉमिक ग्रोथ सुधारों के साथ आगे बढ़नी चाहिए
शक्तिकांत दास के मुताबिक, सबसे अहम है कि आर्थिक वृद्धि मध्यम अवधि के निवेश, मजबूत वित्तीय प्रणाली और संरचनात्मक सुधारों के साथ आगे बढ़नी चाहिए. इसके लिए स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, इनोवेशन, फिजिकल व डिजिटल बुनियादी ढांचे में निवेश को गति देने की जरूरत है. हमें प्रतिस्पर्धा व गतिशीलता को प्रोत्साहित करने और महामारी के कारण बने अवसरों से लाभ उठाने के लिए श्रम व उत्पाद बाजारों में सुधारों को जारी रखा चाहिए.

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