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कोविड-19 वैक्सीन के बारे में डायबिटीज के मरीज क्या जानकारी रखें, जानें यहां

कोविड-19 वैक्सीन में आपकी, आपके परिजनों की और आपके समुदाय की सुरक्षा करने की क्षमता है. ये कोरोना वायरस संक्रमण से लड़ने में शरीर के इम्यून सिस्टम की मदद करती है. इसका मतलब हुआ कि कोरोना के खतरे से आपका शरीर आपको बचा सकता है और वायरस के कारण गंभीर दिक्कतों या बीमार पड़ने की संभावना को कम करता है. इसलिए टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज के मरीजों को खास तौर पर टीकाकरण करवाना महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि उनको कोरोना वायरस से मौत और गंभीर बीमारी का ज्यादा खतरा रहता है.

लेकिन हो सकता है आपके दिमाग में कुछ सवाल हों, मिसाल के तौर पर आप कब लगवा सकते हैं और उसके बारे में आपको अपने डॉक्टर से क्या पूछना चाहिए. हालांकि, पहले से मौजूद पुरानी बीमारी को देखते हुए कई डायबिटिज मरीज कोविड-19 वैक्सीन लगवाने से पीछे हटने लगे हैं. कोविड-19 वैक्सीन अभी कोरोना वायरस के खिलाफ सुरक्षा का सिर्फ ढाल है. लिहाजा, अगर आपको अभी भी कोविड वैक्सीन लगवाने के बारे में हिचक है तो कुछ बातों को ध्यान में रखें. 

क्या डायबिटीज के मरीज कोविड वैक्सीन लगवा सकते हैं?
अब तक रिपोर्ट सामने नहीं आई है कि कोविड वैक्सीन ब्लड शुगर लेवल के साथ शरीर में हस्तक्षेप कर रही है. कई सारे डायबिटिज मरीजों ने टीकाकरण करवा लिया है और सिर्फ साइड इफेक्ट्स की बात कही है जो डोज लगवाने वाले सभी लोगों में आम है. तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए जरूरी हो जाता है कि टीकाकरण को हर शख्स प्राथमिकता दे. डायबिटीज के मरीजों को भी दूसरे लोगों के जैसा साइड-इफेक्ट्स हो सकता है, लेकिन कोई गंभीर जोखिम नहीं है. वैक्सीन से होनेवाला साइड-इफेक्ट्स आम तौर से एक या दो दिन में खत्म हो जाता है. 

क्या वैक्सीन का साइड-इफेक्ट्स डायबिटीज में अलग है?
विशेषज्ञों के मुताबिक, वैक्सीन से साइड-इफेक्ट्स हर किसी में समान रहते हैं. चाहे आप डायबिटिक हों या सेहतमंद, हल्का बुखार, थकान, बाजू का दर्द जैसे सबसे आम साइड-इफेक्ट्स हैं. खास मामलों में किसी को इंजेक्शन वाली जगह पर चकत्ता हो सकता है, जो चिंता की बात नहीं है. लेकिन, कोविड-19 वैक्सीन लगवाने से पहले और लगवाने के बाद डायबिटीज मरीज अपने डॉक्टर से संपर्क में रहें. उनके सुझाव के बिना दर्द दूर करने वाली दवा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.

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