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क्या आ गई तीसरी लहर


कोरोना के नए केसों की संख्या में फिर बढ़ोतरी शुरू हो गई है। मई में दूसरी लहर की पीक के बाद से हर हफ्ते नए केसों की संख्या कम होते जाने का सिलसिला पिछले सप्ताह थम गया। खास बात यह कि कोरोना के सबसे ज्यादा मामले भले केरल में पाए जा रहे हों, नए केसों में बढ़ोतरी दिल्ली समेत 13 राज्यों में देखी गई है। खासकर पहाड़ी राज्यों- हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में तो यह बढ़ोतरी क्रमश: 64 फीसदी और 61 फीसदी की है। जाहिर है, तीसरी लहर के जिस खतरे की बात लगातार की जा रही थी, वह अब करीब आ गया है। दुनिया के कई अन्य देश कोरोना संक्रमण की तेजी से बढ़ती संख्या की चपेट में हैं। जापान में ओलिंपिक खेल तो कार्यक्रम के मुताबिक चल रहे हैं, लेकिन कोविड केसों की बढ़ती संख्या के चलते देश के कई हिस्सों में आपातकाल लागू करना पड़ा है। चीन तो कोरोना से उबर चुका था, लेकिन वहां भी इसने फिर तेजी से सिर उठाया है। नानजिंग शहर इसका नया केंद्र है। 50 फीसदी से ज्यादा आबादी का टीकाकरण हो जाने के बावजूद अमेरिका में भी कोरोना संक्रमण बढ़ रहा है और काफी हद तक यूरोपीय देशों में भी। अपने देश में तो टीकाकरण की रफ्तार भी काफी कम है। करीब 94 करोड़ की वयस्क आबादी में से जुलाई के अंत तक 10.3 करोड़ लोगों को ही वैक्सीन की दोनों डोज लगी थी। यानी लगभग 11 फीसदी।

हाल में सीरो सर्वे के आंकड़ों ने जरूर राहत दी थी, लेकिन ध्यान रखना चाहिए कि उसी सर्वे के मुताबिक करीब 40 करोड़ लोग ऐसे हैं, जिनमें एंटी बॉडीज नहीं डिवेलप हुई हैं। जाहिर है, किसी भी तर्क से हम तीसरी लहर के खतरे को कम करके नहीं आंक सकते। ऐसे में बचाव के उपायों को तेज करने के अलावा और कोई रास्ता नहीं है। ऐसा पहला उपाय टीकाकरण की रफ्तार को यथासंभव तेज करना ही है। पक्ष और विरोध में होने वाली राजनीतिक बयानबाजियों को किनारे करके देखें तो पिछले महीने सरकार ने करीब 66 करोड़ डोज टीकों के ऑर्डर बुक किए हैं। इसके मद्देनजर उम्मीद की जा सकती है कि टीकों की कमी की वैसी समस्या इस महीने नहीं रहेगी जैसी पिछले महीनों में दिखी थी। लेकिन तेज टीकाकरण की राह में यह एकमात्र बाधा नहीं है। सरकारी तंत्र की सीमाएं और आम लोगों की बेरुखी जैसी अड़चनें भी हैं। साल के अंत तक पूरी वयस्क आबादी को टीकाकरण के दायरे में लाने का लक्ष्य पूरा करना है तो रोज करीब 92 लाख डोज देने होंगे। मौजूदा औसत करीब 38 लाख का है। इसके अलावा नए-नए वैरिएंट पर टीकों का कितना असर होता है, यह भी देखना होगा। कुल मिलाकर, जितना हो सके टीकाकरण में तेजी जरूर लाई जाए, लेकिन बचाव का सबसे भरोसेमंद तरीका अभी भी मास्क पहनना, दूरी बनाए रखना और सावधानी बरतना ही होगा।


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