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भारतीय कंपनियों ने जुलाई में किये 13.2 अरब डॉलर के सौदे, तीन प्रतिशत की बढ़त दर्ज


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महामारी के बीच सौदों में जुटी भारतीय कंपनियां


नई दिल्ली। भारतीय कंपनियों द्वारा किये गये सौदों की गतिविधियां जुलाई में तीन प्रतिशत बढ़कर 13.2 अरब डॉलर पर पहुंच गईं। एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। इस दौरान भारतीय कंपनियों ने कुल 181 सौदे किए। परामर्शक कंपनी ग्रांट थॉर्नटन की रिपोर्ट के अनुसार, सौदों की संख्या की बात की जाए, तो जुलाई में इसमें 66 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इससे पता चलता है कि मूल्य के हिसाब से सौदों यानी औसत टिकट आकार में गिरावट आई। पिछले जून महीने से तुलना की जाए, तो मात्रा के हिसाब से सौदों की संख्या छह प्रतिशत बढ़ी। हालांकि, मूल्य के हिसाब से सौदों में 33 प्रतिशत का इजाफा हुआ।

ग्रांट थॉर्नटन के भागीदार शांति विजेता ने कहा, ‘‘सौदों में बढ़ोतरी की प्रमुख वजह यह रही कि कंपनियों ने अपने नकदी भंडार का इस्तेमाल बदलाव लाने वाले सौदों में किया जिससे वे कोविड-19 के बाद की दुनिया के लिए खुद को तैयार कर सकें।’’ विजेता ने कहा कि कंपनी को उम्मीद है कि आगामी महीनों में भी सौदों का रुख सकारात्मक बना रहेगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि 13.2 अरब डॉलर का निवेश 2005 के बाद से किसी एक महीने में सबसे ऊंचा है। जुलाई में 5.6 अरब डॉलर के 36 विलय एवं अधिग्रहण सौदे हुए। सालाना आधार पर मात्रा के हिसाब से विलय एवं अधिग्रहण गतिविधियां 13 प्रतिशत बढ़ीं। हालांकि, मूल्य के लिहाज से इनमें 37 प्रतिशत की गिरावट आई। आंकड़ों के अनुसार इस दौरान 145 सौदों में निजी इक्विटी/उद्यम पूंजी निवेश 7.5 अरब डॉलर का रहा। 

वहीं हाल में ही जारी हुई पीडब्ल्यूसी इंडिया की ‘भारत में सौदे: 2021 के लिये मध्यावधि समीक्षा एवं परिदृश्य-मजबूती और पुनरूद्धार’ शीर्षक से जारी रिपोर्ट के अनुसार एक जनवरी से 15 जून के दौरान, कंपनियों ने 710 लेनदेन के जरिए 40.7 अरब डॉलर मूल्य के सौदों की घोषणा की। यह 2020 की दूसरी छमाही में मूल्य के लिहाज से दो प्रतिशत अधिक है। रिपोर्ट के अनुसार इस साल जनवरी-जून की अवधि में निजी इक्विटी (पीई) गतिविधियां 26.3 अरब अमेरिकी डॉलर के अब तक के उच्चतम स्तर को छू गयी, जो एक साल पहले की इसी अवधि की तुलना में 25 प्रतिशत अधिक है। सौदे से जुड़ी गतिविधियों में उछाल अरबों डॉलर के अधिग्रहण और स्टार्ट-अप द्वारा बड़ी राशि जुटाने से जुड़ा है। रिपोर्ट में कहा गया कि निजी इक्विटी (पीई) निवेशक अपना ध्यान वृद्धि की मजबूत संभावना दिखाने वाले प्रौद्योगिकी और स्वास्थ्य सेवा जैसे क्षेत्रों पर भी केंद्रित कर रहे हैं।

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