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संयुक्त राष्ट्र में भारत ने दुनिया के सामने खोली तालिबान के ‘आका’ पाकिस्‍तान की पोल, एक-एक करतूत गिनाई

हाइलाइट्स

  • सुरक्षा परिषद में भारतीय विदेश मंत्री ने पाकिस्‍तान और चीन पर चुन-चुनकर वार किए
  • जयशंकर ने अफगानिस्‍तान, पठानकोट, पुलवामा के बहाने दुनिया को याद दिलाया
  • उन्‍होंने कहा कि ये देश निर्दोषों के खून से हाथ रंगने वाले आतंकवादियों की रक्षा कर रहे हैं

संयुक्‍त राष्‍ट्र
दुनिया की सबसे शक्तिशाली संस्‍था संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद में भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने गुरुवार को पाकिस्‍तान और उसके आयरन ब्रदर चीन पर चुन-चुनकर वार किए। जयशंकर ने अफगानिस्‍तान, पठानकोट, पुलवामा, मुंबई हमले के बहाने दुनिया को याद दिलाया कि ये देश निर्दोषों के खून से हाथ रंगने वाले आतंकवादियों की रक्षा कर रहे हैं। सुरक्षा परिषद की अध्‍यक्षता करते हुए भारतीय विदेश मंत्री ने दुनियाभर के देशों से आह्वान किया कि वे ऐसे देशों के पाखंड का जोरदार विरोध करें। आइए 10 पॉइंट्स में समझते हैं कि जयशंकर ने कैसे सुरक्षा परिषद में चीन-पाकिस्‍तान की नापाक जोड़ी की पोल खोलकर रख दी….

1-विदेशमंत्री जयंशकर ने बिना नाम लिए ही चीन और पाकिस्‍तान पर जोरदार हमला बोला। जयशंकर ने आतंकवाद से अंतर्राष्ट्रीय खतरे विषय पर सुरक्षा परिषद में आतंकवादी समूहों को सहायता प्रदान करने में पाकिस्तान और चीन की भूमिकाओं की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा, ‘दुर्भाग्य से, कुछ देश ऐसे भी हैं जो आतंकवाद से लड़ने के हमारे सामूहिक संकल्प को कमजोर या नष्ट करना चाहते हैं। इसे पारित नहीं होने दिया जा सकता।’ जयशंकर ने कहा, ‘जब हम देखते हैं कि निर्दोष लोगों के खून से हाथ रंगने वालों को राजकीय आतिथ्य दिया जा रहा है, तो हमें उनकी दोहरी बात पर टोकने का साहस करने से नहीं चूकना चाहिए।’’
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2- भारतीय विदेश मंत्री कश्‍मीरी आतंकियों के अफगानिस्‍तान में सक्रियता का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा, ‘चाहे वह अफगानिस्तान में हो या भारत के खिलाफ, लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे समूह दंड से मुक्ति और प्रोत्साहन दोनों के साथ काम करना जारी रखते हैं। इसलिए, यह महत्वपूर्ण है कि यह परिषद हमारे सामने आने वाली समस्याओं के बारे में एक चुनिंदा, सामरिक या आत्मसंतुष्ट दृष्टिकोण नहीं लेती है। हमें कभी भी आतंकवादियों के लिए अभयारण्यों का सामना नहीं करना चाहिए या उनके संसाधनों को बढ़ाने की अनदेखी नहीं करनी चाहिए।’

3- जयशंकर ने पाकिस्‍तान समर्थित लश्‍कर और जैश आतंकियों को लेकर चीन को जमकर सुनाया। कश्‍मीरी आतंकी संगठनों जुड़े व्यक्तियों और समूहों को बचाने के चीन के प्रयासों के संदर्भ में विदेश मंत्री ने कहा, ‘बिना किसी कारण के अनुरोधों को ब्लॉक और होल्ड न करें।’ आतंकवाद के खिलाफ अपनी कार्य योजना को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि आतंकवादियों और आतंकवादी समूहों से निपटने के लिए परिषद को राजनीतिक या धार्मिक कारणों से नहीं, बल्कि निष्पक्ष रूप से सूचीबद्ध करना और हटाना चाहिए।

4- भारतीय विदेश मंत्री ने आईएसआईएल-खोरासन के खतरे से दुनिया को आगाह किया। जयशंकर ने चेतावनी दी कि ‘हमारे अपने पड़ोस में, आईएसआईएल-खोरासन तेजी से पनप रहा है और लगातार अपने पदचिह्न का विस्तार करने की कोशिश कर रहा है। अफगानिस्तान में होने वाली घटनाओं ने क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों के लिए उनके प्रभावों के बारे में वैश्विक चिंताओं को स्वाभाविक रूप से बढ़ा दिया है।’ उन्होंने भारत द्वारा प्रस्तावित अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक सम्मेलन को शीघ्र अपनाने का आह्वान किया।
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5- जयशंकर ने आतंकियों को बचाने को लेकर भी पाकिस्‍तान और चीन पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक सम्मेलन को कुछ देशों द्वारा बाधित कर दिया गया है जो कुछ आतंकवादियों को ‘स्वतंत्रता सेनानियों’ के रूप में बचाने की कोशिश करते हैं। जयशंकर ने कहा, ‘राजनीतिक इच्छाशक्ति का आह्वान करें : आतंकवाद को न्यायसंगत न ठहराएं, आतंकवादियों का महिमामंडन न करें। कोई दोहरा मापदंड नहीं। आतंकवादी आतंकवादी होते हैं, भेद केवल हमारे अपने जोखिम पर किए जाते हैं।’

6- भारतीय विदेश मंत्री ने कहा कि दुनियाभर में प्रयासों के बाद भी आतंकियों को पैसा मिलना जारी है। उन्होंने कहा कि आतंकवादी संगठनों के वित्तपोषण के खिलाफ कानूनी उपायों को सख्त करने के अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों के बावजूद, उन्हें अभी भी पैसा मिलता है। जयशंकर ने कहा, ‘धन का प्रवाह जारी है और हत्याओं के लिए पुरस्कार अब बिटकॉइन में भी दिए जा रहे हैं।’

7- जयशंकर ने आतंकवाद के सभी पीड़ितों के साथ अपनी एकजुटता व्यक्त करते हुए कहा कि जहां अगले महीने अमेरिका पर 9/11 हमले की 20वीं बरसी आ रही है, वहीं 2008 का मुंबई आतंकी हमला हमारी यादों में अंकित है। वर्ष 2016 का पठानकोट हवाईअड्डा हमला और वर्ष 2019 का पुलवामा में हमारे पुलिसकर्मियों पर आत्मघाती हमले की याद अभी भी ताजा है। हमें कभी भी आतंकवाद की बुराई से समझौता नहीं करना चाहिए।’

8-सुरक्षा परिषद में दिए भाषण में जयशंकर ने अफगानिस्‍तान और पाकिस्‍तान में सक्रिय हक्‍कानी नेटवर्क का भी मुद्दा उठाया। उन्‍होंने कहा कि प्रतिबंधित हक्कानी नेटवर्क की गतिविधियों में वृद्धि इस बढ़ती चिंता को सही ठहराती है। जयशंकर ने कहा कि इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि सुरक्षा परिषद ‘हमारे सामने आ रही समस्याओं को लेकर एक चयनात्मक, सामरिक या आत्मसंतुष्ट दृष्टिकोण नहीं अपनाए।’

9- सुरक्षा परिषद की बैठक में आईएसआईएल (दाएश) की तरफ से अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के लिए उत्पन्न खतरे को लेकर महासचिव की 13वीं रिपोर्ट पर विचार किया गया। तीन अगस्त को पेश रिपोर्ट में कहा गया कि आईएसआईएल-खोरासन ने अफगानिस्तान के कई प्रांतों में अपने पांव पसारे हैं और काबुल में और इसके आसपास अपनी पकड़ मजबूत की है। जयशंकर ने कहा कि आईएसआईएल-खोरासन भारत के पड़ोस में अपनी ताकत बढ़ाते हुए पैर पसार रहा है जिसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने परिषद को बताया कि इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड द लेवेंट (आईएसआईएल) द्वारा गतिविधयों को अंजाम देने के तौर-तरीकों में बदलाव आया है, जिसमें मुख्य रूप से सीरिया और इराक में पकड़ मजबूत करना शामिल है।

10- विदेश मंत्री ने कहा कि भारत मानता है कि आतंकवाद को किसी धर्म, राष्ट्रीयता, सभ्यता या जातीय समूह से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। व्यवस्थित ऑनलाइन प्रचार अभियानों के जरिए कमजोर युवाओं को कट्टरपंथी गतिविधियों में शामिल करना गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। जयशंकर ने कहा कि यूएनएससी के सदस्यों ने आतंकवाद के सभी रूपों एवं अभिव्यक्तियों को कतई बर्दाश्त नहीं करने के दृष्टिकोण का एक स्वर में समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि सदस्यों ने आईएसआईएल (दाएश) द्वारा उत्पन्न खतरों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की।


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