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Asthma Management In Monsoon : माॅनसून में अस्‍थमा पेशेंट को रखना चाहिए खास प्रबंधन, जानें क्‍या कहते हैं विशेषज्ञ

Asthma Management In Monsoon: देश भर में मॉनसून (Monsoon) प्रवेश कर चुका है. इस मौसम में स्‍वास्‍थ्‍य का विशेष ध्‍यान रखना जरूरी माना जाता है. खासतौर पर अगर आप अस्थमा (Asthma) से पीड़ित हैं तो इन दिनों वातावरण में मौजूद ह्यूमिडिटी और प्रजनित बैक्‍टीरिया आपकी तकलीफ को और अधिक बढ़ा सकते हैं. ऐसे में विशेषज्ञ डॉक्‍टर खास देखभाल की सलाह देते हैं. बता दें कि दुनियाभर में करीब दो करोड़ अस्‍थमा पीडि़त लोग हैं जिनमें से हर दस में एक भारतीय है. तो आइए जानते हैं कि अस्‍थमा के मरीजों को इस मौसम में किन खास बातों को ध्‍यान में रखने की जरूरत है.

क्‍या कहना है विशेषज्ञों का

नेटवर्क 18 से बातचीत के दौरान मॉनसून में अस्‍थमा मरीजों की समस्‍या पर क्‍लीनिकल फर्मोकोलोजी डिपार्टमेंट फोर्टिस हॉस्पिटल कोलकाता की डायरेक्‍टर डॉ. सुष्मिता रॉयचौधरी ने बताया कि दरअसल  मॉनसून में कभी गर्मी और कभी सर्दी जैसे बदलाव तेजी से होते रहते हैं जो अस्‍थमा में ट्रिगर का काम करता है.

किन बातों को रखें ख्‍याल

डॉ. सुष्मिता रॉयचौधरी के मुताबिक, इस मौसम में धूल आदि से जहां तक हो सके दूरी बनाए रखना चाहिए. इसके अलावा, घर को हवादार रखना चाहिए और घर में क्रॉस वेंटिलेशन की व्‍यवस्‍था रखनी चाहिए. सबसे जरूरी बात है कि अस्‍थमा मरीजों को अपना इनहेलर रेग्‍युलरली लेना जरूरी है.

मॉनसून में क्‍यों बढता है अस्‍थमा अटैक

इस मौसम में इंडोर डैंपनेस काफी बढ़ जाते हैं और डस्‍ट की समस्‍या भी रहती है. ऐसे में कई अस्‍थमा पेशेंट के लिए ये ट्रिगर का काम करते हैं. इस मौसम में कॉमन कोल्‍ड और इनफ्लएंजा की संभावना भी रहती है जो मरीज के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं.

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किन बातों का रखें ध्‍यान

मैक्‍स हॉस्पिटल के इंस्‍टीट्यूट ऑफ रैस्पिरेटरी क्रिटिकल केयर एंड स्‍लीप मेडिसीन के प्रिंसिपल डायरेक्‍टर डॉ विवेक नानगिया ने बताया कि इस मौसम में अस्‍थमा पेशेंट को अपने हेल्‍थ का खास ख्‍याल रखना जरूरी है. ऐसे में वे अपना चेकअप कराते रहें और डॉक्‍टर के साथ रेग्‍युलर टच में रहें. इसके अलावा अपनी दवाओं और इनहेलर का प्रयोग डॉक्‍टर की सलाह पर लेते रहें.

दवाओं के स्‍टोरेज पर दें विशेष ध्‍यान

डॉ विवेक नानगिया ने बताया कि अस्‍थमा में प्रयोग किये जाने वाले ड्राई पाउडर इनहेलर आसानी से कॉन्‍टैनिमेट हो सकते हैं. ऐसे में इन्‍हें साफ, ड्राई  और ऐसी जगह पर स्‍टोर करें जहां एलर्जी को ट्रिगर करने वाले डस्‍ट आदि ना हों.

घर पर हैं पेट्स तो रहें सावधान

उन्‍होंने बताया कि अस्‍थमा पेशेंट को पेट्स यानी कि कुत्‍ते बिल्लियों से दूरी बनाए रखना जरूरी है क्‍योंकि इनके बाल और डैंड्रफ ट्रिगर का काम कर सकते हैं और उन्‍हें सांस की परेशानी हो सकती है. इसके अलावा पेट्स को घर के अंदर ही रखें क्‍यों कि अगर वे बाहर जाते हैं तो वे एलर्जी करने वाले पार्टिकल्‍स का कैरियर बन सकते हैं.

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घर को रखें डस्‍ट फ्री

घर की सफाई बहुत जरूरी है. रूम में अगर धूलकण हैं तो उन्‍हें साफ करें और बेहतर हो कि अस्‍थमा पेशेंट खुद इनकी सफाई ना करें. ऐसा करने से वे धूल के संपर्क में आ सकते हैं.

स्मेल भी कर सकता है ट्रिगर का काम

अगर घर की सफाई के लिए आप फिनाइल या लाइजॉल आदि का प्रयोग कर रहे हैं तो बता दें कि इनका स्‍मेल भी अस्‍थमा पेशेंट के लिए ट्रिगर का काम कर सकता है.

ठंडी चीजों को खाने से बचें

जहां तक हो सके आप ठंडी चीजों जैसे कोल्‍ड ड्रिंक, आइसक्रीम आदि खानें से बचें. यही नही, अगर आप एसी या पंखे में सोते है तो बेहतर होगा कि आप रूम को अधिक ठंडा ना करें.

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